Sunday, August 10, 2014

मेरा देश महान




धर्म, प्रांत, भाषा, बोली के खूब खो अभिमान ,
प्रांतवाद हर मन में रखकर कौए बाटत ज्ञान।
पंद्रह अगस्त आते ही झड दो देशभक्ति का प्लान।
ललकारो अपने ही आँगन- मेरा देश महान ।।

कौओं की का-का को दे दो कुहु- कुहु सा मान
कोयल भी बोले मैं कौआ, का-का ही हो गान   
अपमानित हो सभ्य यहाँ और झूठों का सन्मान
ललकारो अपने ही आँगन- मेरा देश महान ।। 
                              
- बारकवी         

Sunday, July 27, 2014


तंगड़ी आलिशान ...

तंगड़ी आलिशान, भुना दो तंगड़ी आलिशान
पहले ही दिन सावन के, व्रत का हो बलिदान-
भुना दो तंगड़ी आलिशान...
मछली का बाज़ार भरा, खाली न यूँ पड़ जाय
तरकारी से सस्ती मच्छी, कब तू लेने पाय
सावन महीने की मस्ती में जिव्हा न करना दान
भुना दो तंगड़ी आलिशान

बार बना फूल हैपी अवर्स, चाहे हो दिन-रात
धंधे के सूखे पर दे दी, शेट्टी ने कर मात
मौके-चौके वक़्त व्यर्थ क्यूँ रहना परेशान
भुना दो तंगड़ी आलिशान

-बारकवी